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Woman Constable Complaint: कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली खाकी वर्दी से समाज भरोसे और पारदर्शिता की उम्मीद करता है. लेकिन बरेली से सामने आया एक मामला अब पुलिस विभाग के भीतर व्यक्तिगत आचरण और पेशेवर मर्यादाओं को लेकर सवाल खड़े कर रहा है.
एक महिला सिपाही ने अपने ही विभाग के एक पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि पुलिसकर्मी ने खुद को अविवाहित बताकर उसके साथ संबंध बनाए, शादी का भरोसा दिया और बाद में उसकी वैवाहिक स्थिति को लेकर सच्चाई सामने आने पर पूरा मामला विवाद में बदल गया. शिकायत सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने आरोपी सिपाही अमित चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.
ड्यूटी के दौरान हुई पहचान, फिर बढ़ी नजदीकियां
जानकारी के अनुसार अमित चौधरी बरेली जिले के शाही थाने में तैनात था. इसी दौरान उसकी पहचान विभाग में कार्यरत एक महिला सिपाही से हुई. रोजाना की ड्यूटी और पेशेवर संपर्क के बीच दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो समय के साथ दोस्ती और फिर नजदीकियों में बदल गई. महिला सिपाही का आरोप है कि अमित चौधरी ने शुरुआत से ही खुद को अविवाहित बताया था. बातचीत के दौरान उसने विवाह की इच्छा जाहिर की और भरोसा दिलाया कि दोनों जल्द शादी करेंगे. इन आश्वासनों के चलते महिला सिपाही ने भी इस रिश्ते को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.
एक खुलासे ने बदल दी पूरी तस्वीर
ज्ञात हो कि, महिला सिपाही के अनुसार कुछ समय बाद उसे ऐसी जानकारी मिली जिसने पूरे रिश्ते की बुनियाद हिला दी. उसे पता चला कि अमित चौधरी पहले से शादीशुदा है और यह तथ्य उससे छिपाया गया था. इस खुलासे के बाद महिला सिपाही को गहरा मानसिक आघात पहुंचा. जिस रिश्ते को वह विश्वास और भविष्य की उम्मीद के साथ देख रही थी, उस पर अचानक सवाल खड़े हो गए. इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया. सूत्रों के मुताबिक महिला सिपाही ने इसे केवल निजी विवाद नहीं, बल्कि विश्वासघात का मामला बताते हुए विभागीय शिकायत दर्ज कराई.
मानसिक तनाव की भी चर्चा
बता दें कि, मामले का एक संवेदनशील पहलू महिला सिपाही की मानसिक स्थिति से भी जुड़ा हुआ है. आरोपों के अनुसार सच्चाई सामने आने के बाद वह काफी तनाव में रहने लगी थी. उसके करीबी लोगों का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर उसके कामकाज और सामान्य दिनचर्या पर भी पड़ने लगा था. विभाग के अंदर भी यह चर्चा रही कि पूरा मामला महिला सिपाही के लिए भावनात्मक रूप से काफी कठिन साबित हुआ. इसी वजह से उसने मामले को दबाने के बजाय उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया.
तबीयत बिगड़ने के बाद बढ़ी गंभीरता
वहीं, मामले में नया मोड़ तब आया जब 31 मई को महिला सिपाही की तबीयत अचानक खराब हो गई. चर्चा है कि मानसिक तनाव के चलते उसने अपने पास मौजूद कई दवाइयों का सेवन कर लिया था. हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार किया.
हालांकि इस घटना को लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को और गंभीरता से लेना शुरू कर दिया. आखिरकार महिला सिपाही ने एसएसपी अनुराग आर्य के जनता दरबार में पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में उसने रिश्ते की शुरुआत से लेकर सच्चाई सामने आने तक की पूरी कहानी अधिकारियों को बताई और कार्रवाई की मांग की. बताया जाता है कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने प्रारंभिक स्तर पर तथ्यों की जांच कराई. शुरुआती जांच में सामने आए बिंदुओं के आधार पर आरोपी सिपाही के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया गया.
आरोपी सिपाही निलंबित
दरअसल, एसएसपी अनुराग आर्य ने आरोपी सिपाही अमित चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबन के साथ ही उसे पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है. विभागीय जांच पूरी होने तक वह नियमित ड्यूटी नहीं कर सकेगा. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वर्दीधारी कर्मचारियों से केवल पेशेवर जिम्मेदारियों में ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण में भी उच्च मानकों की अपेक्षा की जाती है. ऐसे मामलों का सीधा असर विभाग की छवि और जनता के विश्वास पर पड़ता है.
विभागीय जांच में किन बिंदुओं पर होगी पड़ताल?
फिलहाल, अब विभागीय जांच के दौरान महिला सिपाही और आरोपी पुलिसकर्मी दोनों के बयान दर्ज किए जाएंगे. शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी. जांच का सबसे अहम सवाल यह होगा कि क्या आरोपी पुलिसकर्मी ने वास्तव में अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाई थी और क्या महिला सिपाही को शादी का भरोसा दिया गया था. इसके अलावा दोनों पक्षों के दावों की सत्यता का भी परीक्षण किया जाएगा. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभागीय नियमों के तहत आरोपी के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल पूरे मामले की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी.


















