13 जुलाई से मानसून सत्र.! विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह से मिले सीएम साय और नेता प्रतिपक्ष महंत..पढ़ें पूरी ख़बर

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Chhattisgarh News/रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसससे पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से स्पीकर हाउस पहुंचकर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई।

जानकारी के अनुसार, मुलाकात के दौरान आगामी विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियों और सदन के सुचारु संचालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्पीकर हाउस से सीधे मंत्रालय के लिए रवाना हो गए। वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी स्पीकर हाउस पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। बैठक के बाद वे स्पीकर हाउस से बाहर निकल गए। इस मुलाकात को सत्र की रणनीति और सदन की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की बनाई है रणनीति

वहीं, छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। अब तक विधायकों की ओर से 1,033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़क निर्माण और मानसून के दौरान व्यवस्थाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। इन मुद्दों को लेकर सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं। विधानसभा में प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

नकटी विवाद पर हंगामे के आसार

दरअसल, रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि से जुड़ा विवाद भी विधानसभा के मानसून सत्र में गूंज सकता है। कांग्रेस इसे सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाने का प्रमुख मुद्दा बनाएगी।

किसानों के मुद्दों पर जवाब मांगेगी कांग्रेस

फिलहाल, मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठेंगे। कांग्रेस खरीफ सीजन में खाद, बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।विपक्ष का आरोप है कि किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।

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