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General Knowledge: भारत में एक नहीं, 5 जंतर-मंतर हैं. जानिए यह जंतर-मंतर कहां पर हैं और इनका इतिहास. साथ ही आपको बताएंगे इनके खासियत के बारे में…
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार (25 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. अभी तक आपने दिल्ली के जंतर-मंतर या राजस्थान जंतर-मंतर के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में 5 जंतर-मंतर हैं. चलिए बताते हैं यह किन-किन शहरों में हैं.

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महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय का अनोखा सपना 18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय खगोल विज्ञान (Astronomy) के प्रति अपने गहरे लगाव के लिए जाने जाते थे. उन्होंने 1721 से 1735 के बीच भारत के अलग-अलग शहरों में 5 जंतर-मंतर बनवाए. इन वेधशालाओं का उद्देश्य समय की सटीक गणना, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जानना, ग्रहण की भविष्यवाणी करना और खगोलीय गणनाओं के लिए सटीक तालिकाएं तैयार करना था.

Jaipur Jantar Mantar
जयपुर जंतर-मंतर राजस्थान के जयपुर में 1728 से 1734 के बीच बना जंतर-मंतर पांचों वेधशालाओं में सबसे बड़ा और सबसे अच्छी स्थिति में मौजूद है. यही एकमात्र जंतर-मंतर है, जिसे UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिला है. यहां 20 विशाल खगोलीय उपकरण हैं, जिनमें दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सनडायल (सम्राट यंत्र) भी शामिल है, जो बेहद सटीक समय बताने के लिए प्रसिद्ध है.

Delhi Jantar Mantar
दिल्ली जंतर-मंतर दिल्ली का जंतर-मंतर 1721 में बना था. संसद मार्ग पर स्थित इस वेधशाला का इस्तेमाल पहले ग्रह-नक्षत्रों की चाल, कैलेंडर और समय की गणना के लिए किया जाता था. लेकिन 1990 के दशक के बाद यह देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बन गया. इससे पहले बड़े आंदोलन बोट क्लब में होते थे, लेकिन 1988 के किसान आंदोलन और सुरक्षा कारणों के बाद प्रदर्शन जंतर-मंतर शिफ्ट कर दिए गए.

Ujjain Jantar Mantar
उज्जैन जंतर-मंतर मध्य प्रदेश के उज्जैन में करीब 1725 में बना जंतर-मंतर उस समय भारत के प्रमुख खगोलीय केंद्रों में से एक था. आकार में यह जयपुर से छोटा है, लेकिन यहां मौजूद उपकरण ग्रहों की स्थिति, आकाशीय निर्देशांक और खगोलीय गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए बनाए गए थे. उज्जैन का प्राचीन समय से भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान में खास महत्व रहा है.

Varanasi and Mathura Jantar Mantar
वाराणसी और मथुरा के जंतर-मंतर वाराणसी का जंतर-मंतर करीब 1737 में गंगा नदी के किनारे दशाश्वमेध घाट के पास एक महल की छत पर बनाया गया था. यहां से गंगा का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है, हालांकि आज यहां पहले की तुलना में कम उपकरण बचे हैं. वहीं मथुरा का जंतर-मंतर भी महाराजा जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था, लेकिन समय के साथ इसे तोड़ दिया गया और आज इसकी मूल संरचना लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है.

क्यों खास हैं भारत के 5 जंतर-मंतर?
भारत के ये 5 जंतर-मंतर सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें नहीं, बल्कि देश की वैज्ञानिक सोच और खगोलीय ज्ञान के प्रतीक हैं।. जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में बने इन वेधशालाओं ने उस दौर में बिना आधुनिक तकनीक के सटीक खगोलीय गणनाएं संभव कीं. इनमें से जयपुर का जंतर-मंतर आज UNESCO World Heritage Site है, जबकि दिल्ली का जंतर-मंतर विज्ञान, इतिहास और लोकतंत्र – तीनों का अनोखा संगम बन चुका है.


















