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Russia-India Trade: रूस का इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल ट्रेड फेयर INNOPROM पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। ब्रिक्स समिट से पहले होने वाले इस आयोजन का मकसद औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना है। यह औद्योगिक सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा।
नई दिल्ली: रूस और भारत आपसी कारोबार को बढ़ाने में जुटे हैं। इसका नतीजा यह है कि रूस का इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल ट्रेड फेयर INNOPROM पहली बार भारत में आयोजित होगा। 9 से 11 सितंबर तक ब्रिक्स समिट से पहले होने वाले इस आयोजन का मकसद औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना है।
हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, INNOPROM का भारतीय संस्करण द्विपक्षीय व्यापार, औद्योगिक सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा। इसमें फार्मास्यूटिकल्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल्स, क्रिटिकल मिनरल्स, मेटलर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड वर्कफोर्स की आवाजाही पर खास ध्यान दिया जाएगा।
भारत के साथ आर्थिक सहयोग
ज्ञात हो कि, इस प्रोग्राम में रूस के पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के शामिल होने की उम्मीद है। वह भारत के साथ आर्थिक सहयोग का काम देखते हैं। ऊपर बताए गए लोगों में से एक ने कहा कि इस मेले से दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा के दौरान नई दिल्ली में हुए भारत-रूस बिजनेस फोरम में लिए गए फैसलों को आगे बढ़ाने की भी उम्मीद है।
उस व्यक्ति ने कहा कि दोनों देश अधिक निवेश और ज्यादा जॉइंट प्रोजेक्ट्स की संभावनाओं के बीच द्विपक्षीय निवेश संरक्षण संधि पर भी काम कर रहे हैं।

बायोकेमिकल इंडस्ट्री में सहयोग पर चर्चा
वहीं, पिछले हफ्ते रूस में सालाना INNOPROM प्रदर्शनी में रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए ग्रीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी), फूड प्रोसेसिंग, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और एग्रो-इंडस्ट्रियल सेक्टर को मुख्य क्षेत्रों के तौर पर बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश बायोकेमिकल इंडस्ट्री में सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं। वे इस सेक्टर के लिए एक जॉइंट स्ट्रेटेजी बना सकते हैं।
हालांकि, कुमार ने कहा कि भारत और रूस नॉन-टैरिफ बैरियर्स को हटाने के लिए भी काम कर रहे हैं। खासकर कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए। वह बोले कि पिछले तीन महीनों के व्यापार के रुझानों के आधार पर दोनों देशों के मौजूदा 2026-27 फाइनेंशियल ईयर में 70 अरब डॉलर (लगभग 6.72 लाख करोड़ रुपये) का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करने की संभावना है। भारत और रूस ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का टारगेट रखा है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत में भी प्रगति
वहीं, भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत में भी प्रगति की है। कुमार ने प्रदर्शनी में बताया कि बातचीत का दूसरा दौर पिछले महीने के आखिर में मॉस्को में हुआ था।
दरअसल, इस महीने की शुरुआत में प्रायोरिटी इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स पर भारत-रूस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक मॉस्को में हुई थी। इस ग्रुप की सह-अध्यक्षता डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के सेक्रेटरी अमरदीप सिंह भाटिया और रूस के डिप्टी मिनिस्टर ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट व्लादिमीर इलिचेव ने की थी।
फिलहाल, दोनों पक्ष दोनों देशों में अवसरों का पता लगाने के लिए निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज, मेटलर्जी, माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।


















